तनाव चिंता डिप्रेशन करें दुर मेडिटेशन से जानिए कैसे ?
इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि चिंता तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या से कैसे निजात पा सकते हैं, वैसे तो कुछ लोगों के लिए यह सुनना आसान लग सकता है पर इसकी गहराई में जाने से पता चलता है कि चिंता व्यक्ति को कैसे भीतर ही भीतर खाए जाता है और किस प्रकार से यह बढ़ते समय में खतरनाक स्थिति बन जाता है , तो आईए जानते हैं इसके कुछ कारण और इस से उबरने के लिए क्या करें !
1. चिंता तनाव डिप्रेशन क्या है ?
देखिए यह शब्द अलग अलग हैं पर यह एक ही चीज को कहा जाता है, चिंता तनाव और डिप्रेशन जैसी शब्दों से भ्रमित ना हों , बल्कि इसे समझने का प्रयास करें, चिंता एक प्रकार से मानसिक रूप से कमजोरी होता है तो भीतर ही भीतर खाए जाता है, और व्यक्ति को देखकर पता लगाया नहीं जा सकता कि यह तनाव में है , बल्कि यह कह सकते हैं कि सामने वाले व्यक्ति पर क्या गुजरती है इस बात से लोग अज्ञात होते हैं, चाहे वो परिवारों को लेकर चिंता हो या खुद के भविष्य, पढ़ाई , नौकरी चाहे जीवन से जुड़ी हर वो एक चीज जो आपको मानसिक रूप से कमजोर बना देती है, यह एक दयनीय स्थिति बन सकती है जब सामने वाले आपको ना समझ पाएं, और आप अपने आप से लड़ रहे हों !
2. आखिर क्यों होती है यह समस्या ?
हजारों व्यक्ति कभी यह नहीं कह पाते उन्हें किसी बात की चिंता है चाहे वो किसी भी बात की चिंता हो, यह मन में एक छुपी ख्याल हो सकता है या यूं कहें कि सामने वाले से कह देने पर वह हमें या हमारी बातों को समझ नहीं सकेगा, कुछ लोग तो पहले से गुमशुदा होते हैं जो डर डर के जीते हैं, और यह मैं नहीं कह रहा यह दुनिया के वो आंकड़े हैं जिसमें ना जाने कितने रिपोर्ट्स आते हैं जहां डिप्रेशन की वजह से हाॅस्पिटलाइज जैसी स्थिति बनती है,
अगर देश दुनिया की बात करें तो डिप्रेशन के शिकार हुए लोगों के आंकड़े इतने चौंकाने वाले आते हैं जिसमें से कई लोग तो सभी चीजों में पहले से सक्षम होते हैं, और वही इस बात पर गौर किया जाए तो आप यह अनुमान नहीं लगा पायेंगे कि हर तरह से सक्षम व्यक्ति आखिर डिप्रेशन का शिकार कैसे हो जाते हैं ?
इस सवाल के जवाब सटीक बता पाना लगभग संभव नहीं है, पर फिर भी कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार हम बताएंगे कि एक्चुअल में ऐसा होता क्यों है !
3. चिंता तनाव और डिप्रेशन के कुछ कारण इस प्रकार हैं
• परिवारिक चिंता - यह एक जिम्मेदार व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी चिंता है जो इन सभी चीजों से जुझता है, परिवार की जिम्मेदारी संभालना यह इतना मुश्किल काम है कि व्यक्ति खुद को जंजीरों में जकड़ा हुआ महसूस करने लगता है जैसे मानो वह एक पिंजरे में बंद हो, और उसे बाहर निकलने का मन हो पर वह निकल नहीं पाता और फंसा हुआ रहता है, देखिए ऐसे मामले उन लोगों को ज्यादा आघात पहुंचा सकता है जिनके घर में कोई बड़ा सदस्य हो या घर का बड़ा लड़का जिसे घर के लिए कुछ भी काम करना पड़े पर वह करता है, पर उसे खुशी का या गम के लिए समय नहीं होता ना ही कुछ सोचने समझने का समय होता है, जिम्मेदारी के बोझ तले इतना दब जाता है कि कभी कह भी नहीं पाता कि उसे क्या पसंद है क्या नापसंद, जिम्मेदारी उठाना पड़ता ही है पर चिंता घेर लेता है !
• करियर की चिंता - व्यक्ति अगर बैचलर है तो लड़की हो या लड़का यह चिंता सताने लगता है कि हमारा भविष्य कैसा होगा और यही सोच में वर्तमान की पढ़ाई लिखाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते , और यह बहुत सारे लोगों में देखा जाता है कि आगे क्या होगा भविष्य हमारा उज्ज्वल होगा कि नहीं या अंधेरा छा जायेगा वगैरह वगैरह, और यह मानसिक चिंता वर्तमान के समय को भी खा जाती है, क्योंकि वह अपने पढ़ाई लिखाई पर ध्यान नहीं दे पाता और भविष्य की चिंता शुरुआती सीढ़ी को भी रोक देता है, ऐसे लोगों को तो यही कहुंगा कि आपके साथ आपके माता पिता हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है, चिंता तो बिना सहारे के लोग करते हैं, क्योंकि साथ देने वाला कोई नहीं होता !
• विवाहित जीवन में - देखिए यह कहना गलत है कि उन्हें बच्चों की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि यह तो हर माता पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे का जीवन उज्ज्वल हो , वहीं पति पत्नी दोनों एक दूसरे की बात समझते हैं तो अच्छी बात है, वरना अकेले जो चिंता तनाव जैसे समस्या आती है वो कहीं ना कहीं आपसी सामंजस्य ना होने की वजह से होता है, जो आप कर रहे हैं क्या आपने वर्तमान जीवन के लिए पर्याप्त नहीं है ?
अगर ऐसा है तो यह चिंता का विषय है पर आपका समाधान तो नहीं है ?
• प्रेम प्रसंग - आज के समय में एक बड़ा ही विचित्र कारण जन्म ले लिया है जो अक्सर युवा पीढ़ी को हो रहा है, पुराने जमाने में एक साथी के दुर रहने से या उसके गुजर जाने से वियोग में पड़े रहते थे ये समझ आता है, पर वर्तमान युवा पीढ़ी प्रेम प्रसंग के इतने करीब होते हैं जहां रिश्ते टुटने और अलगाव होने पर चिंता तनाव के सारी हदें पार कर देते हैं, इन जैसे मामलों में भुख हड़ताल चालू हो जाता है और ये हास्यप्रद है फिर भी यह भी बड़ी समस्या है
• बिजनेस में नुकसान - अमीर लोगों में अगर व्यापार में नुकसान होने पर तनाव में आना और चिंताग्रस्त रहना जैसी समस्या देखी जाती है पर यह लाजमी है कि यह सबके साथ होना तय है कि भारी नुक़सान व्यक्ति को तोड़ देता है क्योंकि उस चीज पर उनका विश्वास बना था तो अचानक सबकुछ खत्म हो गया
• इसी कड़ी में बात करें तो छोटे छोटे बच्चों को भी किसी बात पर चिंता होने लगती है और भी कारण होते हैं चिंता के जो कि इसकी कोई सीमा नहीं है ना उम्र देखता है ना समय
पर आगे क्या नुकसान होता है यह जानिए
4. चिंता तनाव के नुकसान क्या होते हैं ?
• भुख ना लगना - चिंता में व्यक्ति को भुख प्यास नहीं लगता और इन सबसे दुरी बना लेता है और इस कारण व्यक्ति सुखकर कांटा बन जाता है, और जरुरी नहीं कि वजन कम हो सबका , ऐसा नहीं है बल्कि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है !
• नशे की लत - आजकल नौजवान युवकों में यह देखने को मिलता है कि लड़के समेत लड़कियां भी सिगरेट शराब जैसी चीजों के आदि हो जाते हैं, जहां चिंता से बरबाद तो हो ही जाते हैं और अपना शरीर तक बिगाड़ लेते हैं, यह बड़े बिजनेसमैन हो चाहे मध्यम वर्गीय परिवार का सदस्य शराब पीकर चिंता दुर करने की बात करने लग जाते हैं जो संभव नहीं है,
वहीं जो नहीं पीता खाता वो गुमशम खामोश रहने लगता है
• बीपी के शिकार - देखिए चिंता एक चिता के समान है जो जीवित व्यक्ति को मृत बना देता है, शुरुआती पड़ाव में बीपी कंट्रोल में नहीं रहता बल्कि बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव होने लगता है
5. डिप्रेशन के स्टेज और लक्षण ?
• डिप्रेशन का पहला स्टेज - यह वो शुरुआत है जो व्यक्ति शुरुआत में सोचना चालू करता है या किसी भी बात की चिंता करना शुरू करता है जिसमें करियर, पढ़ाई , रिश्ते नाते, पैसे या अन्य चीजों से जुड़ा हुआ होता है, पर मैं बताना चाहूंगा कि यही सबसे बड़ा कारण है आने वाले उस डिप्रेशन के दौर का जिसे नजर से देखा नहीं जा सकता बस दीमक की तरह भीतर ही भीतर खाए जाता है, पर इस बात का अंदाजा लगाए बिना कि चिंता एक बड़ा रोग बन जायेगा
• डिप्रेशन का दुसरा स्टेज - देखिए अब इस पड़ाव में किस तरह यह हावी होने लगता है, इसे समझिए कि मान लीजिए घर हो दोस्त यार हो उनकी किसी भी तरह की चिंताजनक बातें या उंची आवाज़ में बात करने से मन में अजीब सी घबराहट होने लगती है और सांसे फुलने लगी है ऐसा महसूस होता है घुटन सा महसूस होता है, सिर्फ इतना ही नहीं इस स्टेज पर व्यक्ति किसी फिल्म विडियो या किसी भी अन्य आधुनिक तकनीक की चिंताजनक विषय को देखे या सुनें तब भी अजीब सा महसूस करने लगता है, वहीं शोर शराबा भीड़भाड़ से दूरी बनाने लगता है क्योंकि दिमाग पे बहुत जोर पड़ने लगता है और दर्द भी होता है !
• डिप्रेशन का तीसरा स्टेज - इस स्टेज में व्यक्ति सबसे दूरी तो बना लेता और खुद को एक बंद कमरे में बंद कर के रहना पसंद करता है जैसे वो दुनिया से परे हो, पर इस स्टेज में वह अकेला होकर भी खुद को शांत नहीं कर पाता और इस स्टेज को काफी चिंताजनक मान सकते हैं, क्योंकि इसमें यह होता है कि व्यक्ति जब सोने की कोशिश करता है तो वह व्यक्ति सपने में भी ऐसी चीजें देखने लगता है जिस विषय में वो पहले से परेशान है और इतना ही नहीं, दिमाग तरह तरह की बातें खुद से सोचने लगता है और फिर नींद खुल जाता है और घबराहट होने लगता है और बेकाबू हो जाता है क्या करुं क्या करुं , दैनिक दिनचर्या में भी किसी के साथ घटित घटनाओं को देखकर दिमाग खुद से अपने जीवन में जोड़कर दिखाने लगता है जैसे कि वो घटना खुद की हो और वो परेशानी आपकी हो , तब दिल खुद के वश में नहीं रहता बस दिमाग इस से खेलता है !
• डिप्रेशन का चौथा स्टेज - इस स्टेज की बात करें तो यह बड़ा दयनीय स्थिति बन सकती है अगर व्यक्ति खुद को संभाल ना सके क्योंकि बीपी का स्तर बहुत गिर जाता है और लो हाइपरटेंशन स्टेज पर आ जाता है उदाहरण के लिए बीपी 60 -70 तक रहने लगता है तो आप ही सोचिए जहां बीपी का समान्य स्तर ही 100-110 के बीच रहता है और तब जाकर लोग ठीक रहते हैं वहां पर स्तर का नीचे गिरना और लगातार उतार चढ़ाव होना किस परिस्थिति में ला सकता है, कभी कभी मिर्गी के दौरे जैसे पड़ने लगते हैं और और आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है और व्यक्ति खड़े खड़े गिर भी जाता है लगभग अधिकांश लोगों में ऐसा देखने को मिलता है !
• डिप्रेशन का पांचवां स्टेज - इसे आखिरी स्टेज मानता हूं मैं क्योंकि 10 में से 9 व्यक्ति तो इस स्टेज में ही हार जाते हैं और पागलपन कि स्थिति आ जाती है और इस स्टेज में दिमाग की नसें फटने या पागल होना आम बात है, समय रहते परिजन समझ जाते हैं तो वह किसी डाॅक्टर की मदद लेते हैं और उसके लिए मेडिकल ट्रीटमेंट लेते हैं जिसमें व्यक्ति को समझने का प्रयास किया जाता है और उसे उस डिप्रेशन से बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है, और वहीं कोई गांव देहात का हो तो लोग ध्यान नहीं देते पर लोग ज्यादातर मामलों में मानसिक रूप से विछिप्त हो जाते हैं और कुछ दिनों बाद पागलपन के शिकार हो जाते हैं
इसी में अगले कड़ी की बात करें तो अचानक किसी चिंताजनक आकस्मिक घटनाओं का असर दिमाग झेल नहीं पाता और हार्ट-अटैक आ जाता है और मृत्यु हो जाती है और यह ज्यादातर बिज़नेस करने वालों को होता है क्योंकि यह अचानक घटने वाली घटनाएं हैं जिसे कोई अंजान नही होता
वहीं गांव देहात में भी हार्टअटैक आ जाता है इसलिए इस स्टेज तक आने से बचें !
6. डिप्रेशन के स्टेज पर बिना मेडिकल ट्रीटमेंट के कैसे खुद को काबू करें ? अचानक ऐसी स्थिति आने पर ?
इसमें कुछ ऐसी बातें बताना चाहूंगा जो आपको करना है
• सबसे पहले तो चिंता करना छोड़ दीजिए
• चिंता करके वो सभी चीजें ठीक तो नहीं हो सकता
• सबसे घुल मिल कर रहिए क्योंकि अकेलेपन में दिमाग पर शैतान हावी होता है
• अचानक बीपी बढ़ जाने वाली स्थिति पर और नींद खुल जाने पर एक गिलास ठंडे पानी पीजिए मन शांत करने के लिए पंखे चलाईये और चुपचाप बैठ जाइए
• बढ़े हुए स्तर पर जिसमें आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है ऐसी स्थिति पर आप चोकलेट कैंडी अपने साथ रखे रहें और ऐसे ना हो तो शक्कर पानी घोलकर पीएं, क्योंकि ऐसी स्थिति में बीपी के साथ शुगर लेवल बहुत घट जाता है जिसके कारण आपको चक्कर आता है या अंधेरा छा जाता है, इसलिए कैंडी चोकलेट आपको थोड़ा सा मदद करता है !
• जितना जल्दी हो सके परिजन को बताइये ताकि आप खुद को काबू कर सकें, अन्यथा आप डाॅक्टर से मिलिए
• स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने पर डाॅक्टर नींद की गोली देते हैं जिसके बाद रात को परेशानी नहीं होती पर यह स्थाई समाधान नहीं है, क्योंकि दिन में तो दिमाग उन सब चीजों को फिर से सोचेगा जो चिंता तनाव बढ़ा देगा
• नींद की गोली लगातार ना लें क्योंकि ये आपके लीवर और हार्ट पर चोटिल नुकसान पहुंचाने लगता है, गंभीर मामलों में आधे टुकड़े गोली खाएं
नोट - जिस बात की चिंता है उस बात को ना करने से नींद की गोली की जरूरत नहीं पड़ती , और चिंता एक चिता के समान है जो आपको जीवित जला देता है इसलिए आप खुश रहिए परमात्मा आपका कल्याण करेगा
7. बिना डॉक्टरी इलाज के खुद को कैसे ठीक करें ?
देखिए यह कहना कि बिना डॉक्टरी इलाज कैसे करें कहना सही नहीं होगा क्योंकि वर्तमान समय में एक उस जगह जहां बहुत सारे डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों को रखा जाता है और उनका देखभाल किया जाता है और उस जगह से आपको निकाला जाता है जहां आपको जंजीरों में जकड़ा हुआ महसूस होता था, इसलिए आज के समय में डाक्टरों से इस विषय पर बात करना चाहिए और अपना इलाज कराना चाहिए, चुंकि यह शारीरिक बीमारी नहीं बल्कि मानसिक बीमारी है तो आपको डरने की जरूरत नहीं है वहां आपको कोई परेशानी नहीं होने वाली
दुसरी बात यह है कि सभी लो इतने अमीर तो नहीं होते की खुद का ट्रीटमेंट डाक्टरों से करवायें, मध्यम वर्गीय परिवार तो इस से बाहर निकलने के बारे बस विचार कर पाता है उस से ज्यादा कुछ नहीं इसलिए आपके लिए मैं एक उपाय बताऊंगा जो आपके लिए कारगार साबित हो सकता है
नोट - डिप्रेशन को ठीक करने के लिए दुनिया में कहीं कोई दवाई नहीं बना है इसलिए मानसिक रूप से मजबूत होना और इस चक्रव्यूह से बाहर निकलना आपके लिए बहुत जरुरी है !
8. मेडिटेशन ध्यान साधना से खुद को ठीक कर सकते हैं ?
जी हां यह आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा क्योंकि यह परिक्षित प्रयोग है हमारे पास आने वाले मरीजों का, देखिए ध्यान साधना से बहुत जल्दी रिकवर होगा यह कहना सही नहीं होगा बल्कि जितना परेशानी आपको हो रहा है इसी प्रकार ध्यान साधना से भी होता है जबतक कि दिमाग थोड़ा बहुत अपने वश में आना शुरू ना कर दे !
सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि ध्यान साधना करने पर आपको दिमाग पर जोर पड़ सकता है थोड़ा दर्द का अनुभव हो सकता है फिर भी आपको यह नहीं कह रहे हैं आप जोर डालो खूद पर बल्कि शुरू से शुरुआत करो पहले एक मिनट दो मिनट दो और यह मिनटों की अवधि बढ़ाते जाओ
ये करें नीचे 👇
• सबसे पहले एकांत कमरे में रात को जब वातावरण शांत हो तब बैठें
• आंखें बंद करके आप किसी एक केंद्रित चीज पर ध्यान लगाएं, अर्थात आप उसे आंख बंद करके भी ध्यान में देखने का प्रयास करें, शुरू शुरू में यह होना संभव नहीं होता क्योंकि मन हवा के समान है विचलित होकर यहां वहां चला जाता है तुरंत
• सिर्फ एक दिन का काम नहीं है यह बल्कि शुरुआत में एक दो मिनट दीजिए मन जब स्थिर हो जाए उस ध्यान केंद्रित चीज पर जिसको आप आंखें बंद करके देख रहे हैं तो समझ जाइए आप अब खुद को काबू करने के प्रथम चरण में हैं ( वैसे तो ऊं का ध्यान लगाया जाता है अक्सर) पर आप किसी भी एक चीज पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं
• ऐसा आप करते करते ज्यादा देर तक कर पायेंगे तब आप सुबह जल्दी उठकर भी ध्यान साधना कर सकते हैं और लगातार यह प्रक्रिया दोहराते रहने से आप पुरी तरह अपने आप को काबू कर सकते हैं
• प्राचीन काल में ऋषि मुनियों द्वारा भी दुर दुर पहाड़ पर्वत में जाकर ध्यान साधना करने का जिक्र मिलता है पौराणिक काल से ही यह मान्यता चली आ रही है जहां आपके प्रश्नों का उत्तर ना मिले वहां एकांत मन से योग ध्यान साधना करना चाहिए और अपने आप को पुर्ण रुप से मजबूत बनाना चाहिए, और यह परांपरागत विद्या भी है जो आपके जीवन को सुधारने में मदद करेगा
9. मेडिटेशन करने के बाद सकारात्मक प्रभाव पड़ता है !
जी हां हम बात कर रहे हैं मेडिटेशन ध्यान साधना की तो आपको बता दें कि जब आब इसमें निपुण होते जाते हैं तो एक नई ऊर्जा का एहसास होता है और खुद को मजबूत महसूस करते हैं
• डिप्रेशन से बहुत हद तक आप बाहर आ जाते हैं और सकारात्मक सोच आपको दुनिया से और खुद की कमजोरी से लड़ने में मदद करने लगता है
• नींद बहुत अच्छे से आती है मानों बरसों से सोये नहीं थे
अच्छी बातें मन में चलने लगती है मानो कुछ नहीं है फिर भी सबकुछ है
• लोगों से बात करते समय घबराहट नहीं होता और खुलकर बोलने की क्षमता मिलती है यह ध्यान साधना आपको ऊर्जावान बनाता है
• जब आप पुर्ण रुप से मानसिक रूप से मजबूत हो जाएं तब खूद को समझाएं कि जिस नर्क से हम निकले हैं उसमें दुबारा हमें नहीं जाना है
10. आयुर्वेद भी आपकी मदद करने में सहायक होता है जानें
सबसे पहले तो बता दूं कि आप इस परेशानी के दौर में हो तो मेडिटेशन के साथ साथ कुछ औषधि भी है जो आपके लिए सहायक हो सकता है जैसे कि नीचे देखें 👇
अश्वगंधा - अश्वगंधा का बहुत प्रयोग होता है जिसमें तनाव कम करने वाले गुण होते हैं जिसका सेवन आप 2-3 ग्राम कर सकते हैं सोने से पहले , और इसे पुरुषों के लिए बेहतर मान सकते हैं
शतावरी - शतावरी महिलाओं के लिए वरदान है जिसे खाने से आपकी नींद अच्छी आयेगी और साथ ही मजबूत महसूस करेंगे क्योंकि शतावरी का सीधा संबंध दिमाग के हार्मोनल सिस्टम से जुड़ा हुआ है जो सीधा यह असर करेगा जिसपर आपका ध्यान है, इसका सेवन पुरुष महिला दोनों कर सकते हैं सोने से पहले 2-3 ग्राम की मात्रा में
ब्राम्ही - जी हां ब्राम्ही को हमारे छत्तीसगढ़ में "बेंग भाजी" कहा जाता है जो दिमाग को मजबूत करने में सहायक होता है और इसे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सेवन करते हैं इसका भाजी सेवन करने से लाभ होता है, जिसे हमारे छत्तीसगढ़ में भाजी के रुप में किया जाता है
धनिया तेजराज - जी हां यह हमारे बैगा आयुर्वेद में प्रचलित है जो सीधा दिमाग पर असर डालता है और मन को कंट्रोल करने में मदद करता है (इसे आप पंसारी के दुकान से नहीं ले सकते क्योंकि इसके गुण धर्म वर्तमान में बहुत कम लोग जानते हैं, अगर चाहिए होगा तो संपर्क करें)
तो ये था डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए कुछ टिप्स जिसे आप पढ़कर खुद को ठीक कर सकते हैं और इस पोस्ट को आप शेयर कर सकते हैं ताकी और भी जो लोग होंगे जो इस परेशानी से जूझ रहे हैं उन्हें मदद मिले !
नोट - किसी भी प्रकार की औषधि की जरूरत हो तो आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ताकि हम आप तक भेज सकें
धन्यवाद !
वैद्यराज
छत्तीसगढ़ जड़ी बूटी
Tags
Daily Health Tips






