1. हट जायेंगे आंखों से चश्मे और दिखेंगे नजारे साफ साफ ?
जी हां दोस्तों आंखें एक ऐसी चीज होती है जो हमारे लिए सबसे जरूरी है जिसके ना होने से अंधेरा छा जायेगा जीवन में, और वहीं इसके होने से आप दुनिया देख सकते हैं, हमारे शरीर में प्रमुख रूप से आंख,हाथ पैर यह इतने जरुरी है कि व्यक्ति एक बार गुंगा बहरा हो तो भी चल जाएगा इसारे से बात कर लेगा पर ये आंखें सही सलामत नहीं रहेंगी तो क्या कर सकते हैं,
2. नया युग छीन रहा है आंखों की रोशनी ?
आधुनिक युग में जिस प्रकार से तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा प्रचलित है डिजिटल दुनिया जिसमें नयी तकनीकी उपकरणों का प्रयोग घटा रहा है आंखों की रोशनी और वह कौन कौन सी चीजें हैं जो इनपे लागू होती है
• T.V देखना - बहुत सारे बदलाव हो चुके हैं आजकल जिसमें डिजिटल LED TV, LCD TV यहां तक की फोन भी बड़े बदलाव के साथ आते हैं जो पहले के मुकाबले बेहतर है और आंखों को नुकसान होने से बचाते हैं और यह दावा कम्पनी का है, पर कितना आराम आज मिला इन आंखों की रोशनी से ये बात तो आंखों के रोगी ही बता सकते हैं, पर सभी लोगों के पास उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद नहीं है जो आज भी पुराने जमाने वाले उत्पादों का प्रयोग करते हैं जिसमें तेज रोशनी प्राकशित होती है और यह टीवी बल्ब मोबाइल फोन भी शामिल है !
• कम्प्यूटर लैपटॉप - देखिए इसकी शुरुआत तो काफी पहले हो चुकी थी पर 21 वीं सदी में प्रचलन इतनी तेजी से हो रहा है कि बैंक,ऑफिस, प्राइवेट सेक्टर, सरकारी ऑफिस, स्कूल काॅलेज जगह अपना पैर पसार चुका है और यह व्यक्ति के जीवन से जुड़ गया है इसके बिना कोई काम नहीं होता और इसे चलाने वालों की आंखों की रोशनी कम होने लगी है, और हो ना क्यूं? आखिर इसके बिना व्यक्ति काम भी तो नहीं कर सकता
• मोबाइल फोन - कम्प्यूटर के बाद व्यक्तिगत जीवन में जरूरी हो चुका उपकरण है तो वो है मोबाइल फोन जिसे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस्तेमाल किया जा रहा है, और मोबाइल फोन चला चला कर आंखों की रोशनी खोते जा रहे हैं, फिर भी फोन चलाना कम नहीं हो रहा, मोबाइल फोन से सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जुड़ कर मनोरंजन किया जाता है चाहे बच्चे कार्टून वीडियो देखें या बड़े लोग सिरियल, यह एक गंभीर विषय है जो आपके आंखों से जुड़ा हुआ है, बच्चे जिद्दी होते हैं वो किसी भी प्रकार की आधिकारिक चीजों को अपने हाथों में लिए मतलब छुआ मतलब वो वापस नहीं करने वाला इसलिए कम से कम उम्र के बच्चे भी चश्मा लगा रहे हैं
• उम्र का बढ़ना - उम्र के बढ़ते पड़ाव में व्यक्ति की नजर कमजोर होने लगती है और इसे रोका नहीं जा सकता जिसके बाद पुर्ण रुप से रतौंधी की शिकायत आ जाती है, और इस पड़ाव में तो दवाई भी काम करना लगभग बंद होने लगता है
• गेमिंग करना - मोबाइल फोन हो या कम्प्यूटर आज के लड़के लड़कियों दोनों गेम खेलने के आदि होते जा रहे हैं और लगातार गेम खेलते रहने से इसको चश्मा लगाना पड़ता है
• मशीन कंपनी में - कई लोग के काम ही ऐसा है जो लगातार टकटकी लगाए देखते रहना पड़ता है जिसके कारण आंखें कमजोर पड़ जाती है और यह बहुत दिनों बाद पता चलता है बाकी उपकरणों के मुकाबले, और इसी कारण आपलोगों ने देखा है कि व्यक्ति को रतौंधी जैसी शिकायत हो जाती है
• बैंक या सरकारी काम - यह आज के नये युवा पीढ़ी में बहुत अधिक काम में व्यस्त रहने वाले काम हैं कम्प्यूटर से संबंधित जुड़ी होती है जो हमारे देश के संपत्ति अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण योगदान है और लगातार घंटों तक कुर्सी पर बैठे बैठे कम्प्यूटर को ताकते रहना पड़ता है
• कम्प्यूटर संबंधित तकनीक - जैसा कि डिजिटल दुनिया का बोलबाला है तो इसके खराब होने पर इसे बनाने वाले भी होंगे तभी तो बनेगा, ऐसा ही है जो हार्डवेयर साफ्टवेयर इंजीनियर होते हैं वो भी लगातार जुड़े होते हैं, उसके अलावा आईटी सेक्टर में भी कम्प्यूटर पर लगातार कार्य होता है जो कहीं ना कहीं डिजिटल दुनिया में तेजी लाने वाला काम है और ऐसे लोगों को भी आंखों की परेशानी होती है
• पढ़ाई और प्राइवेट ऑफिस - पढ़ाई की भी बात कर सकते हैं जिसमें कई विद्यार्थी अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं डाॅक्टर, इंजिनियर, काॅमर्स से जुड़े हुए साथ ही किसी भी पद को प्राप्त करने की शिक्षा में पुरी उत्तीर्ण होने के लिए जिस प्रकार से मेहनत और लगन से पढ़ाई करते हैं उनकी आंखों पर शुरुआत में ही चश्मे लग जाते हैं, यहां तक कि आजकल छोटे बच्चों में भी ऐसा हो जाता है, साथ ही प्राइवेट ऑफिस में खुद के प्रोजेक्ट में फंसे कम्प्यूटर के घेरे में रहने वाले लोग भी शामिल है
• कारखाने में काम - इस विषय में बहुत कम लोग गहराईयों से सोचते होंगे जहां बड़े बड़े कारखाने में गर्म वातावरण होता है जो लौह अयस्क से जुड़ा हुआ होता है और वहां काम करने वालों की आंखों की रोशनी कम हो जाती है
• धुल प्रदुषण वाले स्थान - भारत की बात करें तो यह कहना मुश्किल है की प्रदुषण मुक्त हो पायेगा जहां दिल्ली जैसे मेट्रो सिटी में भी प्रदुषण से अछुता नहीं रहा है तो आम क्षेत्रों में तो कोयला खनन और अन्य खनिजों के खनन के और वायु प्रदूषक कम्पनी हैं जो वातावरण को प्रदुषण युक्त बना दिए हैं, और वहां के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग भी इसके चपेट में आते हैं और आंखों में धुल धुआं की मार झेलते हैं
ऐसे और भी उदाहरण है जिसमें कही ना कही लगातार टकटकी लगाकर देखना पड़ता है और यह हमारे आने वाले समय बाद आंखों की रोशनी पर दुष्प्रभाव डालने के लिए काफी है
4. क्या नुकसान होते हैं इसके
• आंखों में जलन और धुप पर निकलने पर तेज रोशनी से आंखों में चुभन जैसा महसूस होता है और कहीं सफेद चमकदार रंग हो तो आंखों से आंसू भी आने लगते हैं ं
• आंखें लाल लाल दिखाई देना जैसे कोई नशीली चीजों का सेवन किया हो जैसे दिखने लगते हैं और यह तकनीक भरा होता है क्योंकि आंखों की लालिमा आने पर खुश्की और भौं पर जलन उत्पन्न होने लगता है
• आंखों में धुंधलापन दिखाई देने लगता है और दुर की चीजें साफ नहीं दिखाई देती है जिसे हमे किसी चीज को दूर से पहचानने में परेशानी होती है
• कुछ लोगों को बढ़ते समय में रंगों का वास्तविक पहचान खोते हुए भी देखा गया है जिसमें उसे किसी एक प्रकार के ही रंग दिखाई देगा चाहे वो कोई भी चीज देखे जिसे मेडिकल भाषा में Colour Blindness Disease कहा जाता है !
• वास्तविक रंग से अलग दिखाने देना जैसे नीला या पीला रंग , मतलब इसमें व्यक्ति को आंखों पर जो भी आकर्षित (Reflection) होता है वह उसके विपरीत रंग दिखाने लगता है
• आने वाले समय में रतौंधी जैसे अंधेरा होते ही कुछ दिखाई ना देना, और फिर पुरी तरीके से रोशनी खो देना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है
ये तो थी कुछ बातें जिसमें इसके नुकसान के बारे में बात किए हैं, अब आगे बात करते हैं इसके लिए आधुनिक विज्ञान में क्या है
5. आधुनिक युग में आंखों के लिए कुछ चीजें
चश्मे का प्रयोग - सबसे पहले तो डाॅक्टर के पास जाने पर चश्मे लगाने की सलाह दिया जाता है जो कुछ समय पर चश्मे के नंबरों में बदलाव करने के लिए कहा जाता है,और तब जाकर साफ दिखाई देता है, पर यह भी दिन भर या रात भर लगाने के लिए नहीं होता बल्कि किसी विशेष काम के लिए जो आप करते हैं उसमें वो साफ दिखाई दे इसलिए बाकी समय में आप उसे निकाल देते हैं, वहीं पर कुछ लोगों के चश्मे के नंबरों पर अलग बदलाव से दिनभर भी चश्मा लगाया जाता है !
• आंखों में ड्राप - कई लोगों को देखा गया है कि आंखों पर ड्राप लगाते रहने का आदत डालना जो आंखों के साफ दिखाई देने का समाधान तो नहीं है पर आंखों में धुल धुआं गया हो वह निकल जाता है
• लेन्स का प्रयोग - कई लोग चश्मे को हटाकर आंखों में लेंस लगवा लेते हैं जो आजकल दो तरह के होते हैं, एक तो सबकुछ साफ दिखाई दे इसलिए ऐसा करवाते हैं, और कुछ लोग सिर्फ आंखें सुन्दर और आकर्षक दिखे इसलिए पर प्रकृति के द्वारा दिया गया अनमोल चीजों को यह रिप्लेस नहीं कर सकता बल्कि समय आने पर यह भी आपके आंखों पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगेगा
• आंखों का आपरेशन - आंखों का आपरेशन करवाना जैसी स्थिति बड़ी गंभीर होती है जिसमें यह कहना संभव नहीं होता कि रोशनी वापस आयेगी या नहीं, क्योंकि वो आंखों के पुतले की सफाई या उस से छेड़छाड़ जैसी प्रक्रियाएं में शामिल है , इस स्थिति से बचना चाहिए
• 6 आंखों के नुकसान से बचने के लिए क्या करना चाहिए ?
देखिए मेरा जवाब सिर्फ एक ही है कि डिजिटल दुनिया के नये तकनीक से थोड़ा बच के रहें और जितना हो सके मोबाइल फोन, वगैरह कम चलाइए और सुरक्षित रहिए
• लगातार ड्राप लगाने से भी बचना चाहिए आपको
• धुल धुआं वाले स्थान पर सामान्य चश्मे लगाइये, और बाइक पर सफर करते समय अक्सर सामान्य चश्मे लगाकर रखें
• आंखों को अच्छे से साफ कीजिए, और आंखों को मसलने जैसा कोई कार्य मत कीजिए
• फोन पर अक्सर Eye Care Mode , Eye Protection Mode के आप्शन को चालू रखिए और ज्यादा देर तक फोन मत चलाइये
• आधी रात तक फोन को आंखों के करीब लाकर मोबाइल चलाना बंद कीजिए, दुर से भी दिखाई देता है, मोबाइल में घुस जाने जैसा हरकत मत कीजिए
ये तो थी जो जरूरी बातें जो मेरे द्वारा मरीजों को सलाह दिया जाता है अब आगे यह बताऊंगा कि इसको आयुर्वेदिक तरीके से ठीक कैसे करें
7. आयुर्वेद में है इसका समाधान
देखिए वैसे तो बड़े बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह सोचना कि आयुर्वेद हमें ठीक कर देगा यह उनके दिमाग में नहीं आता क्योंकि वो आधुनिक विज्ञान से जुड़े हुए हैं, पर इसी कड़ी में बात करते हैं उन लोगों की जो हजारों सालों की परंपरा को आज भी विश्वास करते हैं, क्योंकि आयुर्वेद बिना छति पहुंचाए आपको ठीक करने में सक्षम है
8. कौनसी आयूर्वेदिक औषधि है जो आंखों की रोशनी बढ़ाती है ?
देखिए इसमें जो औषधि है उनके नाम हैं शतावरी जो कि किसी से छुपा नहीं है बल्कि भारतवर्ष के साथ साथ अन्य देशों पर भी आयूर्वेदिक दवाओं में शतावरी चूर्ण का प्रयोग किया जाता है जो हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, तो आज हम बताएंगे शतावरी के विषय में जो आपके आंखों को साफ दिखाई देने में मदद करता है
जी हां शतावरी के जड़ तो शक्तिशाली है ही पर उसके पत्ते आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं, जिसके सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है
9. शतावरी आंखों के लिए कैसे फायदेमंद है और प्रयोग विधि क्या है ?
शतावरी के कोमल पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालकर उसे शहद के साथ लिया जाए तो 15-20 दिनों में आंखों की रोशनी तेज हो जाती है और आंखों के सारी समस्या दूर हो जाती है यह एक परिक्षित प्रयोग है जिसका प्रयोग करके लाभ ले सकते हैं
सेवन विधि - एक चम्मच शहद में चार पांच बूंद ताजी शतावरी पत्तियों का रस
नोट - आपके पास आयुर्वेद के वैद्यों से प्ररामर्श ले लें
खुद से प्रयोग करने पर आप मात्रा को भूल सकते हैं
10 . आयुर्वेद चुने स्वस्थ रहें
मेरे यूट्यूब चैनल से जुड़ें लोग और गुगल सर्चिंग से आए लोग जिनको भी किसी बीमारी से संबंधित कोई सवाल हो तो वह कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं या कोई आयूर्वेदिक दवा चाहिए हो तो संपर्क करें
धन्यवाद !
वैद्यराज
छत्तीसगढ़ जड़ी बूटी



